कवि : अभिषेक कुमार 'अभ्यागत' की कविता : दोस्ती
देखते ही देखते,
हवाओं सा उड़ गय,
कभी जो हमने साथ;
बिताए थे, दोस्तों के संग ।
वो मस्ती,
वो रंग,
वो उमंग,
आज वह हवाएं
मौन दिशा से उड़कर,
उन दोस्तों की छवि गंध लिए;
मेरे चित्त को महकाने आयी है,
उनकी यादों की बरसात लिए,
उमड़ी है, मेरे अंतर्मन को भिगोने,
और, मैं भीगकर मानों
अपनी दोस्ती का हाथ थामें,
अपने दोस्तों के साथ चल रहा हूँ ।
- अभिषेक कुमार 'अभ्यागत'
हवाओं सा उड़ गय,
कभी जो हमने साथ;
बिताए थे, दोस्तों के संग ।
वो मस्ती,
वो रंग,
वो उमंग,
आज वह हवाएं
मौन दिशा से उड़कर,
उन दोस्तों की छवि गंध लिए;
मेरे चित्त को महकाने आयी है,
उनकी यादों की बरसात लिए,
उमड़ी है, मेरे अंतर्मन को भिगोने,
और, मैं भीगकर मानों
अपनी दोस्ती का हाथ थामें,
अपने दोस्तों के साथ चल रहा हूँ ।
- अभिषेक कुमार 'अभ्यागत'

Thanks sir
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