कवि : अभिषेक कुमार 'अभ्यागत' की कविता : ईश्वर वन्दना
भर दे भगवन हम में वह शक्ति ,
मनोबल हो जाए सुदृढ़ मिटे अंधभक्ति,
तेरी करुणा में डूब कर मैं पार करूँ,
मुझ से अलक्षित ना रहे अखिल व्यक्ति ।
ले चलो नाथ मुझे उस पथ पर,
सत्य और विश्वास हो जिस पथ पर,
तुम हो नदी, मैं हूँ एक किनारा,
तुम ही प्रश्न, तुम ही हो उत्तर ।
हे प्रभु, मुझे वह प्रकाश बना दे,
भूले-भटके मार्ग की पहचान बता दे,
दे सकूँ जो विश्व को मैं,
वही आस, नवजीवन में जगा दे ।
- अभिषेक कुमार 'अभ्यागत'
साभार ('काव्य कुसुमाकर' पुस्तक से )
प्रकाशन- त्रिवेणी प्रकाशन, डेहरी आन सोन, रोहतास (बिहार)
मनोबल हो जाए सुदृढ़ मिटे अंधभक्ति,
तेरी करुणा में डूब कर मैं पार करूँ,
मुझ से अलक्षित ना रहे अखिल व्यक्ति ।
ले चलो नाथ मुझे उस पथ पर,
सत्य और विश्वास हो जिस पथ पर,
तुम हो नदी, मैं हूँ एक किनारा,
तुम ही प्रश्न, तुम ही हो उत्तर ।
हे प्रभु, मुझे वह प्रकाश बना दे,
भूले-भटके मार्ग की पहचान बता दे,
दे सकूँ जो विश्व को मैं,
वही आस, नवजीवन में जगा दे ।
- अभिषेक कुमार 'अभ्यागत'
साभार ('काव्य कुसुमाकर' पुस्तक से )
प्रकाशन- त्रिवेणी प्रकाशन, डेहरी आन सोन, रोहतास (बिहार)

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