दलित चेतना का विद्रूप चित्र - हाशिए का चाँद /एक पुस्तक समीक्षा/ पुस्तक लेखक डाॅ. हरेराम सिंह
" कब तक रहेगा ब्राह्मणों का कब्जा इस समाज पर कब समाज मुक्त होगा उनकी मुट्ठी से कब उन्मक्त हो सभी सांसे लेंगे गैर ब्राह्मण कब हसेंगे ? " डाॅ.हरेराम सिंह की इस छोटी सी कविता में , जिसे उनके ताजातरीन कविता संग्रह ' हाशिए का चाँद ' ( किशोर विधा निकेतन प्रकाशन वाराणसी, मूल्य 400) लगभग कवि के बुनियादी जीवन के यथार्थ और तल्ख अनुभव व व्यवहार को दर्शाता है, जो कवि की विश्व दृष्टि यानी समाज में घटित घटनाओं का एक विविध प्रपत्र ...